पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी

भारत शर्मा और अनुराधा पौडवाल द्वारा छठ पर्व का यह गीत बहुत ही कर्णप्रिय है . इसमे पुरुष स्त्री से पूछता है घाट पर छठी माता को अर्घ्य किसके लिए दे रही हो . जवाब में स्त्री कहती है की मै अर्घ्य अपने बेटे के लिए दे रही हूँ . इस गीत में प्रश्न उत्तर का बहुत ही सुंदर प्रस्तुति की गयी है .

 

 

पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी

ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी

पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी
ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी
ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी

पटना के घाट पर दिहिला अरघिया हो बेटा लागी
ए करीला छठ बरतिया ही बेटा लागी

पडत भुईया अयिलू छठी माई के घटिया
बड़ा रे कठिन कयिलू छठी के बरतिया

 

दउरा में जरे तोहरा घिउवा के बतिया हो

करा लागी
दउरा में जरे तोहरा घिउवा के बतिया हो केकरा लागी
ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी
ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी

केहू मांगे अनधन केहू मांगे अंखिया के जोति
मईया से मांगी हम मंगिया के मोती
दुखिया के दिनवा में तू होइह संघतिया हो  साथी लागी
दुखिया के दिनवा में तू होइह संघतिया हो साथी लागी

ए करीला छठ बरतिया हो साथी लागी
ए करीला छठ बरतिया हो साथी लागी

कातिक चईतवा में दिही जे अरघिया
सुतल बईठल जागी ओकर भगिया
सुखी रही बाल बच्चा अउरी अउरातिया हो , बेटा लागी
सब करेला छठ बरतिया हो बेटा लागी

पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी
पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी
पटना के घाट पर देबेलु अरघिया हो , केकरा लागी

ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी
ए करेलू छठ बरतिया हो केकरा लागी

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