छठ एक ऐसा पर्व है, जहां समानता और सद्भाव की अनूठी बानगी देखने को मिलती है। प्रकृति से प्रेम, सूर्य और जल की महत्ता का प्रतीक यह पर्व पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। पर्व में जो भी फल या सामान चढ़ाये जाते हैं, जैसे केला, नीम, आम का पत्ता और डाली, बांस से बने सामान जैसे सूप, दऊरा आदि, दीया, सूथनी, आंवला आदि सभी चीजें किसी न किसी रूप से हमारे जीवन से जुड़े हुए है। हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन के लिए इनके पौधों का संरक्षण जरूरी है और यहीं संदेश देता है छठ पूजा का यह महापर्व।

 

 छठ पूजा पहला दिन – नहाय खाए 
 छठ पूजा का दूसरा दिन – खरना 
 छठ पूजा का तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य 
 छठ पूजा का चौथा दिन – उषा अर्घ्य 
 विधि-विधान
 छठ पर्व का इतिहास  
 छठ पर्व से जुड़ी लोककथाएं और कहानियां  
 छठ पर्व 2018 के लिए सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय 

Facebook Comments